Friday, 17 July 2015

Soch

Kabhi tere pyar me shochu, Maine kya khoya  aur kya mila |
Na faja mili, Na Bafa mili, Na Khuda mila, Na Sanam mila||

Thursday, 16 July 2015

Swabhiman

Mile har jakham ko muskan se seena nahi aaya:
Amarta chahte the par jahar peena nahi aaya:
Tumhari aur hamari dasta me fark itna hai.
Tumhe jeena nahi aaya, Hame marna nahi aaya:

Sada to dhoop ke hatho me hi parcham nahi hota

Sada to dhoop ke hatho me hi parcham nahi hota;
khusi ke ghar me bhi bholo kabhi kya gam nahi hota:
fakat ek aadmi ke vaste jag chorne walo:
fakat uss aadmi se ye jamana kam nahi hota:

मगर देवदास मत होना

खुद से भी मिल सको, इतने पास मत होना
इश्क़ तो करना, मगर देवदास मत होना

देखना, चाहना, फिर माँगना, या खो देना
ये सारे खेल हैं, इनमें उदास मत होना

जो भी तुम चाहो, फ़क़त चाहने से मिल जाए
ख़ास तो होना, पर इतने भी ख़ास मत होना

किसी से मिल के नमक आदतों में घुल जाए
वस्ल को दौड़ती दरिया की प्यास मत होना


मेरा वजूद फिर एक बार बिखर जाएगा
ज़रा सुकून से हूँ, आस-पास मत होना

Wednesday, 15 July 2015

तुम्हारी छत पे निगरानी बहुत है

           






तुम्हें जीने में आसानी बहुत है
तुम्हारे ख़ून में पानी बहुत है
ज़हर-सूली ने गाली-गोलियों ने 
हमारी जात पहचानी बहुत है
कबूतर इश्क का उतरे तो कैसे 
तुम्हारी छत पे निगरानी बहुत है
इरादा कर लिया गर ख़ुदकुशी का 
तो खुद की आखँ का पानी बहुत है
तुम्हारे दिल की मनमानी मेरी जाँ
हमारे दिल ने भी मानी बहुत है

महफ़िल महफ़िल मुस्काना तो पड़ता है

महफ़िल महफ़िल मुस्काना तो पड़ता है
खुद ही खुद को समझाना तो पड़ता है
उनकी आँखों से होकर दिल तक जाना
रस्ते में ये मैखाना तो पडता हैं
तुमको पाने की चाहत में ख़तम हुए
इश्क में इतना जुरमाना तो पड़ता हैं

Tuesday, 18 September 2012

Najar

 
"नज़र-नज़र में उतरना कमाल होता है ,
नफ़स-नफ़स में बिखरना कमाल होता है
बुलंदियों पे पहुंचना कोई कमाल नहीं ,
बुलंदियों पे ठहरना कमाल होता है ......" (साहिल)